महत्वपूर्ण नेटवर्किंग डिवाइसेस - Understanding Network Devices in hindi

DEEPCHAND KUMAR
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अभी के समय में इन्टरनेट हर घर और ऑफिस की में लगा होता है लेकिन सायद आप नहीं जानते होंगे की हमें इन्टरनेट से जुड़ने के लिए कौन - कौन से नेटवर्किंग डिवाइसेस की आवश्यकता होती है | जो हमें इन्टरनेट को सुरक्षित और Efficiently इस्तेमाल करने में सहायता प्रदान करता है तो चलिए उस डिवाइस के बारें में जानते है | 

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What is a Modem and how it connects your network to the internet?

मॉडेम को मॉड्यूलेटर-डिमॉड्यूलेटर के नाम से भी जाना जाता है यह एक ऐसा उपकरण है जो डिजिटल सिग्नल को एनालॉग सिग्नल में और एनालॉग सिग्नल को डिजिटल सिग्नल में कन्वर्ट करता है | चुकी जो टेलीफ़ोन लाइन या ऑप्टिकल फाइबर केबल में जो सिग्नल ट्रेवल करता है वो एनालॉग सिग्नल्स होता है जो हमारें डिजिटल कंप्यूटर को समझ में नहीं आता है | तो यही पर हमारा नेटवर्किंग डिवाइस मॉडेम का इस्तेमाल किया जाता है | 

In this image you can see some most important networkign devices like router,swithc, icon of firewall

 

किसी भी कंप्यूटर को इन्टरनेट से जोड़ने का काम करता है | मॉड्यूलेटर डिजिटल सिग्नल्स को एनालॉग सिग्नल्स में बदलता है और  डिमॉड्यूलेटर एनालॉग सिग्नल्स को डिजिटल सिग्नल्स में बदलता है | 

यह आपके नेटवर्क को इंटरनेट से कैसे कनेक्ट करता है?

हमारा कंप्यूटर या राऊटर मॉडेम से जुड़ा होता है और मॉडेम इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर की लाइन से टेलीफ़ोन लाइन ,केबल ,ऑप्टिकल फाइबर या DSL के माध्यम से जुड़ा होता है |

और जब भी हम अपने ब्राउज़र से इन्टरनेट के ऊपर कुछ रिक्वेस्ट करते है तो तो मॉडेम इस रिक्वेस्ट को एनालॉग सिग्नल्स में कन्वर्ट करके ISP तक भेज देता है | ISP का सर्वर इसे आगे भेज देता है और जब कोई रिस्पांस सर्वर से आता है तो ISP इसे हमारे मॉडेम तक भेजता है और मॉडेम उस एनालॉग सिग्नल्स को डिजिटल सिग्नल्स में कन्वर्ट करके राऊटर या हमारे कंप्यूटर तक भेजता है | निष्कर्ष यह की की मॉडेम एक अनुवादक के तरह काम करता है | 

इन्टरनेट क्या है ?

What is a Router and how it directs traffic?

राऊटर भी एक प्रमुख नेटवर्किंग उपकरण है जो यह तय करता है की डेटा पैकेट्स किस कंप्यूटर पर जाना है और किस कंप्यूटर से डेटा लेकर आना है | कहने का अर्थ यह है की राऊटर डेटा पैकेट्स को डेस्टिनेशन तक पहुँचाने का काम करता है | यह एक सेंट्रल उपकरण या सेंट्रल मार्गदर्शक उपकरण के तरह कार्य करता है | 

राऊटर कैसे काम करता है ? 

राऊटर को कंप्यूटर या लैपटॉप से जोड़ा जाता है और जब कोई डेटा भेजा जाता है तो डेटा पैकेट्स में टूटकर राऊटर तक आता है और राऊटर इन्टरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस और नेटवर्क के नियम व शर्तो के आधार पर तय करता है की कौन सा डेटा पैकेट्स किस रास्ते से जायेगा यह डेटा को सही सर्वर या डिवाइस तक भेजता है | और फिर जब इन्टरनेट से डेटा वापस आता है तो फिर से राऊटर उस डेटा को सही कंप्यूटर तक पहुँचाने का कार्य करता है | 

राऊटर क्या है पूरी जानकारी 

राऊटर और मॉडेम में प्रमुख अंतर क्या है ? 

मॉडेम : मॉडेम इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर से कनेक्शन बनता है |

राऊटर : यह डेटा पैकेट्स को सही डिवाइस तक पहुँचाने का कार्य करता है |

स्विच और हब : लोकल नेटवर्क में कैसे काम करता है ? -Switch vs Hub: how local networks actually work?

लोकल एरिया नेटवर्क का अर्थ है की हमारे घर या हमारा छोटा सा ऑफिस जहाँ कई सारे डेस्कटॉप कंप्यूटर लैपटॉप कंप्यूटर ,प्रिंटर ,स्कैनर इत्यादि एक साथ जुड़े होते है इसे जोड़ने का काम स्विच और हब करता है | बस दोनों का काम करने का नियम कायदा अलग -अलग है | 

हब ( HUB ) :

हब एक साधारण सा नेटवर्क डिवाइस है जो लोकल एरिया में सभी डिवाइस को एक साथ जोड़ने का काम करता है  नेटवर्क में डेटा भेजता है | लेकिन यह डेटा को नेटवर्क में जुड़े सभी डिवाइस के पास भेज देता है | भले ही उसे डेटा को किसी एक डिवाइस के भेजा गया हो इससे नेटवर्क के सभी डिवाइस पर ट्रैफिक बढ़ जाता है और डेटा सिक्यूरिटी का इशू रहता है | 

स्विच (Switch ) :

यह एक स्मार्ट नेटवर्क उपकरण है जो लोकल एरिया नेटवर्क में सभी डिवाइस को एक साथ जोड़ने का काम करता है | लेकिन यह डिवाइस के IP और MAC एड्रेस को देख कर डेटा पैकेट्स को सेंड करता है | इससे होता यह है डेटा को जहाँ जाना रहता है वही जाता है न की हब के तरह सभी डिवाइस पर भेज देता है जिससे डेटा तेज और सुरक्षित रहता है | 

लोकल नेटवर्क कैसे काम करता है ?

सभी कंप्यूटर / प्रिंटर हब या स्विच से जुड़ा होता है अगर लोकल नेटवर्क हब से जुड़ा है तो डेटा भेजते समय हब डेटा को सभी कंप्यूटर तक पहुँचा देता है वही अगर लोकल नेटवर्क को स्विच के माध्यम से कनेक्ट किया गया है तो स्विच ip और mac एड्रेस के आधार पर सिर्फ डेटा वही भेजता है जहाँ जाना चाहिए | अगर लोकल नेटवर्क इन्टरनेट से जुड़ा हुआ है तो हब या स्विच रिक्वेस्ट को राऊटर तक भेजता है और रिस्पांस को लोकल नेटवर्क से जुड़े डिवाइस तक लेकर आता है | 

What is a Firewall and why security lives here?

फ़ायरवॉल एक साइबर सुरक्षा उपकरण या सॉफ्टवेयर है जो हमारे नेटवर्क और इन्टरनेट के एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है  | यह तय करता है की कौन सा डेटा हमारें कंप्यूटर से बाहर जाना है और कौन सा डेटा बाहर से हमारे कंप्यूटर में आना है | 

फ़ायरवॉल कैसे काम करता है ? 

इन्टरनेट से आये हुए हर डेटा पैकेट्स की जाँच करता है जैसे की IP एड्रेस , पोर्ट नंबर , डेटा का प्रकार | अगर डेटा पैकेट्स सुरक्षित है तो फ़ायरवॉल इसे कंप्यूटर में आने देता है अगर डेटा पैकेट्स हानिकारक है तो फ़ायरवॉल उसे रोक देता है | 

सुरक्षा यहीं क्यों रहती है ?

इन्टरनेट की दुनिया काफी बड़ा है यहाँ अच्छा बुरा सारें काम होते है इन्टरनेट पर वायरस वाले सॉफ्टवेयर होते है हैकिंग होता है काफी ट्रेफिक होता है फ़ायरवॉल इस तरह के गतिविधियों को निगरानी कर उसे रोकता है | अगर हम कोई वायरस वाले सॉफ्टवेयर को हम अपने कंप्यूटर में इंस्टाल करते है जो फ़ायरवॉल उसे सॉफ्टवेयर को इनस्टॉल नहीं होने देता है | 

लोड बैलेंसर क्या है और स्केलेबल सिस्टम को इसकी क्यों ज़रूरत होती है? - What is a Load Balancer and why scalable systems need it?

लोड बैलेंसर एक नेटवर्क डिवाइस या सॉफ्टवेयर है इसके नाम से ही इसका अर्थ व्यक्त होता है यह क्लाइंट द्वारा किए गए रिक्वेस्ट को एक से अधिक सर्वर भी बीच सामान भागो में बाँटने का कार्य करता है जिसे सर्वर के ऊपर ओवरलोडिंग नहीं होता है | और क्लाइंट को रेस्पोंस काफी फ़ास्ट मिलता है | 

लोड बैलेंसर कैसे काम करता है ? 

यूजर का रिक्वेस्ट लोड बैलेंसर के पास आता है लोड बैलेंसर यह चेक करता है की कौन सा सर्वर फ्री है या किसके ऊपर कम लोड है रिक्वेस्ट उस सर्वर तक भेज देता है | 

स्केलेबल सिस्टम में लोड बैलेंसर की जरुरत क्यों है ?

क्योंकि की बड़े सिस्टम में हजारों लाखों में यूजर एक साथ रिक्वेस्ट भेजते है अगर सभी रिक्वेस्ट एक ही सर्वर पर जायेगा तो सर्वर क्रैश हो सकता है या रिस्पांस काफी देर से देगा जिससे यूजर परेशान होकर वेबसाइट को छोड़कर चला जायेगा पर यही अगर लोड बैलेंसर होगा तो यूजर द्वारा किए गए रिक्वेस्ट को सर्वर को बीच बाँट देंगे जिससे काफी स्मूथ रिस्पोंस देखने को मिलेगा |

डेटा कम्युनिकेशन से आप क्या समझते है ?

How all these devices work together in a real-world setup?

चलिए देखते है की ऊपर जिन नेटवर्क डिवाइस के बारें में जाना है उसका रियल वर्ल्ड में किस तरह से उपयोग होता है इसका क्या स्टेप रहता है |

1 . इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर ( ISP -जैसे Airtel ,Jio ,BSNL )

२. मॉडेम : ISP को लाइन से जोड़ने का काम करता है जो डिजिटल डेटा को एनालॉग और एनालॉग डेटा को डिजिटल में बदलने का काम करता है |

३. फ़ायरवॉल (Firewall ) : यह मॉडेम के बाद आता है जो इन्टरनेट से आने वाले हानिकारक डेटा पैकेट को हमारें कंप्यूटर में आने से रोकता है | 

4. राऊटर ( Router ) : यह फ़ायरवॉल के बाद आता है इसका काम होता है डेटा पैकेट्स को सही डिवाइस पहुँचाना 

५.स्विच और हब ( Switch or hub ) : यह घर या ऑफिस में लोकल नेटवर्क बनाने में मदद करता है वही स्विच डेटा को सही कंप्यूटर तक पहुंचता है लेकिन अगर हब के माध्यम से लोकल नेटवर्क में बना रखा है तो डेटा पैकेट को सभी कंप्यूटर तक भेज देगा | 

६.लोड बैलेंसर ( Load Balancer ) : बड़े डेटा सेण्टर में राऊटर के बाद इसे लगाया जाता है जो जो क्लाइंट द्वारा किए गए रिक्वेस्ट को सर्वर पर लोड को देखते हुए उसे बराबर में बाँटने का काम करता है | 

निष्कर्ष : 

इस ब्लॉग में आपने जाना की नेटवर्क में उसे होने में प्रमुख डिवाइसेस के बारें में जाना जैसे की मॉडेम क्या है ?, राऊटर क्या है ? , फ़ायरवॉल क्या है ? , स्विच और हब क्या है ? लोड बैलेंसर क्या है ? तथा आपने यह भी जाना की ये सभी डिवाइस कैसे काम करता है |

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